जन गण मन उध्वस्त हो चला
और काँपे उद्विग्न ये धरा
मधुशाला में मस्त हो चले
युव भारत पीके यूँ मदिरा
"कल किसने है देखा यारों"
मस्ती में बोले यूँ बेफ़िकर
बावरे है ये, ना जाने इतना
जीवन-आस मिटाए ये वचन
"लक्ष्य" ना छपा बस परदेपे
सरल नहीं है यूँ जीवन-रण
कवच कुंडल जब जब लुट जाएँ
वीर कर्ण न पा गया मरण?!
हाँ, वही करो जो लगे तुम्हे सही
मार्गक्रमणका वो एक अध्याय
पर "जो जो करे वो वो भरे"
वहां सृष्टीका यही होगा न्याय
कर्म करो ना सोचो फल की
ये नहीं है अच्छा अभिप्राय
पर, फल संहारनके एप्सितसे
आत्मा को न हो पाए अपाय!
कहे आदित्य ये युव-भारतसे
हम, बस हम ही रखते है वो शक्ति;
"राष्ट्र निर्माण से स्तिमित हो जग सारा"
जन गण मन की अब यही हो उक्ति!
Few things...
ReplyDelete1. realyy great work man.especially with rhyme scheme...impresive
2. Hndi jara avaghad hote samjayala.
3. ratri 12 wajata asa kahi suchat asel tar problem ahe man...