उत्तुन्ग है तू, अदम्य है, दुश्मनके लिए अगम्य है,
इस रणमे जो तेरी तोप चले, उजले आसमान धरती यूँ हिले,
मुजे गर्व है तुझपे ए दोस्त मेरे, आतंकको तेरे बाहू कुचले
हो परास्त शत्रुकी सेना, तुझे लक्ष्य नजरमे आया ऐसा है
विजयने सिखाया बचपनसे “डर” शब्द हमने न सीखा है
नीलाने किया संस्कारित यूँ, आचरण में तूने लाया है
है वीर जवान तू देश का वो, अर्जुनही जो रण में आया हो
न थक तू पार्थ न विचलित हो, कुरुक्षेत्रमे जब लख शंख ध्वनित हो
हाँ है गर्व हमें तुझपे यूँ बड़ा, हिमालयकी रक्षामे तू डटके खड़ा
विजयी भव चिरंजीव भव, क्या रखे हम इससे मनोरथ बड़ा?
उत्तुंग है तू, अदम्य है, दुश्मनके लिए अगम्य है,
तो कर काबुमे तू ये सृष्टी , पाई है जो तूने विलक्षण दृष्टी!
Dedicated to my best friend and brother Cpt. Mayur Kadam
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